DJ

डॉ जेपी कड़वासरा को अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में "शिक्षा श्री सम्मान" से किया गया सम्मानित



समाजिक सरोकारों में देते हैं हमेंशा अपनी सेवाएं

नवलगढ़ न्यूज़ (श्रवण कुमार नेचु) -  बीकानेर के सींथल स्थित गुरुकुल बी.एल. मोहता लर्निंग इंस्टीट्यूट में "देश की आधी आबादी (नारी शक्ति) का पूर्ण योगदान" विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का सफलता पूर्वक आयोजन किया गया। झुंझुनू सीकर जिले से डॉ. जगदीश प्रसाद कड़वासरा को "शिक्षा श्री सम्मान" से सम्मानित किया गया। 


इस सेमिनार का आयोजन बीकानेर के सींथल में स्थित गुरुकुल बी.एल. मोहता लर्निंग इंस्टीट्यूट में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित और महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर (Maharaja Ganga Singh University Bikaner) के सहयोग से आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में अमेरिका,  भूटान, नेपाल, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान सहित देश के अनेक विख्यात शिक्षाविदों ने शिरकत की। संगोष्ठी के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। जिसमें तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. जगदीश प्रसाद कड़वासरा आचार्य शिक्षा ग्रामीण महिला महाविद्यालय सीकर ने की। डॉ. जगदीश प्रसाद कड़वासरा ने झुंझुनू और सीकर जिले का नेतृत्व करने "सत्यभामा के सामाजिक और शैक्षिक योगदान" विषय पर किए गए शोध पत्र वाचन एवं इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने पर "शिक्षा श्री सम्मान" से सम्मानित भी किया गया। संपूर्ण सेमिनार का आयोजन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डॉ. राजेंद्र श्रीमाली ने डॉ. कड़वासरा द्वारा इस सेमिनार में दिए गए योगदान के लिए उनका धन्यवाद ज्ञापित किया तथा अनेक साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने भी डाॅ.कड़वासरा को इस कार्य के लिए ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
डाॅ. कड़वासरा ने तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए अपने संबोधन में कहा कि आज भारतीय नारी न केवल घरेलू और सामाजिक व्यवस्था को ही बनाए रखा हुआ है अपितु आज विभिन्न क्षेत्रों में यहां तक की अंतरिक्ष, पर्वतारोहण और नेतृत्व क्षमता में भाग लेते हुए राजनीतिक क्षेत्र में अपना प्रचम लहराया है। देश की आधी आबादी यानि, नारी शक्ति के इस योगदान को हम कभी नहीं भुला सकते। अगर यह नारी शक्ति इस मुकाम पर नहीं पहुंचती तो आज आधी शक्ति पुरुष जाति का अस्तित्व भी नहीं रहता। अतः हम सबको चाहिए कि हम भारतीय नारी का कदम से कदम मिलाकर साथ दें, उनका सम्मान करें और उनको आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करते रहें। नारी शक्ति को सदैव आगे बढ़ाने के लिए जो भी योगदान पुरुष द्वारा किया जा सकता है, यथासंभव समय-समय पर इस प्रकार का कार्य करते रहना चाहिए। सेमिनार के समापन सत्र का संचालन डॉ. राजेंद्र श्रीमाली ने करते हुए सभी का धन्यवाद एवं आभार व्यापित किया।