नवलगढ़ न्यूज (विकास कुमावत) - यूनाईटेड ग्लोबल पीस फाउंडेशन के तत्वावधान में कस्बे में बाबा रामदेव मंदिर के पास चल रही जीणमाता की कथा सुनने के लिए रविवार को सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। ना सिर्फ नवलगढ़ बल्कि आसपास के गांवों से भी माताजी के भक्तों ने पहुंचकर कथा श्रवण की। तृतीय दिवस की कथा सुनाते हुए रविवार को कथावाचक महंत डॉ. करणीप्रताप महाराज ने कहा कि जगदम्बा की कृपा प्रताप से सारा संसार चल रहा है। आराधना और साधना करने पर देवी जीण भवानी अपने परमभक्त घांघू के महाराज गंगोसिंह के आंगन पधारी। इस दौरान उन्होंने भगवान शंकर व पार्वती के विवाह के प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर की सबसे बड़ी भक्त मां पार्वती रही है। माताजी महाराज ने तीन हजार वर्षों तक तपस्या की। उनकी परीक्षा लेने के लिए सप्तऋषि आए। सप्तऋषियों ने माताजी की तपस्या देखी। उन्होंने पार्वती से कहा कि हे देवी आप क्या चाहती हो। तब पार्वती ने कहा कि मैं शिवजी को पति के रूप में प्राप्त करना चाहती हूं। मेरे गुरू नारदजी ने उपदेश दिया है कि तू तपस्या करेगी तो तुझे शिवजी मिल जाएंगे। इसलिए करोड़ों जन्मों तक तपस्या करुंगी या तो शिवजी से ब्याह करुंगी या फिर कंवारी रह जाउंगी। देवी पार्वती की ऐसी लीला देखकर सप्तऋषि नतमस्तक हो गए। ऐसी तपस्या देखकर सप्तऋषी बोले हम आपकी तपस्या और भक्ति शंकर भगवान को निवेदन करेंगे। सप्तऋषि भगवान शंकर के पास पहुंचे और बोले कि हे भोलेनाथ देवी पार्वती तो आपको पति के रूप में मान चुकी है। भक्ति और तपस्या को देखकर भगवान शंकर बारात के साथ पार्वती के यहां पहुंचे और पार्वती से विवाह किया। उन्होंने कहा कि भगवान ने मनुष्य में अकल्पनीय शक्ति भरी है। भक्ति और तपस्या करने से भगवान अवश्य मिलते हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। इससे पूर्व उन्होंने तीसरे दिन की कथा के शुभारंभ पर १०८ मंगल नामों से देवी की अर्चना की। २० अगस्त तक होने वाली कथा का समय दोपहर दो से शाम छह बजे तक है।
जीणमाता का जन्मोत्सव मनाया
इससे पूर्व शनिवार को जीणमाता का जन्मोत्सव मनाया। जैसे ही घांघू के महाराज गंगोसिंह चौहान के घर पर जयन्ती के रूप में जीणमाता का अवतरण हुआ वैसे ही चारों तरफ खुशी छा गई। एक दूसरे को बधाईयां बांटी गई। श्रद्धालु भाव विभोर होकर नाच उठे। मां जीण के अवतरण पर कथास्थल पर केक काटा गया।
नेत्र चिकित्सा शिविर का उठाया लाभ
कथास्थल पर रविवार को आंखों का निशुल्क शिविर भी लगाया गया। शिविर का कथावाचक महंत डॉ. करणीप्रताप महाराज ने शुभारंभ किया। इस मौके पर ३५० लोगों ने अपनी आंखों की जांच करवाई। इनमें से २८० लोगों का चश्मे के लिए चयन किया गया। जिनको २० अगस्त को चश्मे वितरित किए जाएंगे। वहीं शिविर में २५ रोगियों का आंखों के ऑपरेशन के लिए चयन किया गया। जिनके ऑपरेशन जयपुर में निशुल्क किए जाएंगे। इस मौके पर सताक्षी आई हॉस्पिटल जयपुर के स्टाफ तथा डॉ. रोहिणी शर्मा व डॉ. गिरिजा चारण ने सेवाएं दी। गोविन्द सिंह करीरी ने सहयोग किया।